Sunday, August 22, 2010

मेरी ग़ज़ल:किसी शख्स ने तोडा मेरा गुरुर

किसी शख्स ने आके तोड़ा मेरे गुरूर देखो.
मिलने लगे घी आज कल,सबसे हुजूर देखो.
किसी शख्स ने आके तोड़ा मेरे गुरूर देखो.

पतझड़ में खिल उठी है कलिया ये प्यार की,
होठो पे है हसी अब, आँखों में नूर देखो.
किसी शख्स ने आके तोड़ा मेरे गुरूर देखो.

महबूब है दूर हमसे दिल में है बेकरारी,
इस तदपन में भी खुसी के, पाल ये जरूर देखो.
किसी शख्स ने आके तोड़ा मेरे गुरूर देखो.

हमको कहाँ पता था मुहब्बत की ये अदा है,
शोले चुभा के दिल में, खड़े है दूर देखो.
किसी शख्स ने आके तोड़ा मेरे गुरूर देखो.

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