Monday, December 15, 2014

पुराना दर्द

पुराना दर्द अभी थमा भी न था की दिल एक दर्द फिर सह रहा है। 
बिखरी है मुस्कराहट मेरे होठो पर सो खुश हु मै, नादान ज़माना कह रहा है। 
ऐ ज़माना लाख डूब जा गर्त तक तू ,मगर जमीं न मिलेगी,
ये दर्द का वो दरिया है जो मेरे सीने से बह रहा है।


पास आने की जुर्रत भी होनी चाहिए किसी मिशाल के तौर पर। 
कब तक चलता रहेगा , यूँ सिलसिला-ए- अजनवी।



खूब दौलत बनाई है हमने अपने हुनर-ए-जूनून से। 
फिर भी खड़े है दूर कितने , आज भी सकून से।



तंग आ जाता हूँ उनके बार - बार गुजारिश से लेकिन।,
परेशां हो जाता हूँ जब वो गुजारिश नहीं करते.


थम गया होगा तेरे आशुओँ का सैलाब इस मौसम की खुशमिजाजी मे,
मगर तेरे आशुओ की वो नमी मेरे आंखो मे आज भी है



मुद्दतोँ से इंतज़ार था किसी किसी आशिकी का मुझे।
या खुदा मिले भी तो एक बेवफ़ा मिले।

परेशां हूँ

परेशां हूँ इश्क की तक़ल्लुफ़ में इस कदर , कि खफा की उनसे मिलने की तमन्ना नहीं। 
फिर खड़ा हूँ इंतज़ार में एक दीदार के लिए।

उसकी मौत कि खबर कुछ युँ सरेआम हो गयी।

उसकी मौत कि खबर कुछ युँ सरेआम हो गयी। 
कोशिश थी मेरे कत्ल कि मगर खुद कतलेआम हो गयीं। 
जहाँ होना था रुशवा मेरी शहादत पर उस बेवफ़ा को,
उफ़! वहां मेरी वफ़ा खुद बदनाम हो गयी।

मेरी मुहब्बत का सफ़र भी अज़ीब था.

मेरी मुहब्बत का सफ़र भी अज़ीब था. 
कभी ये करीब था कभी वो क़रीब था. 
डूबा रहा जिश्म मे मगर रुह न मिलीं,
ये थी खुशनसीबी या मै बदनशीब था.

जीत की उम्मीद पर लड़ता रहता हूँ मैं

बहुत रो लिए तेरे सितम - वो - करम में ऐ जिंदगी , 
अब तो तेरी नुमाइस पर भी खिलखिलाता रहता हूँ मैं। 
कितना डरता था कभी नाराजगी से तेरे , 
अब नाराज करके भी तुझ पर हँसता रहता हूँ मैं। 
प्यार बुझती है तेरी अगर आंशुओं से मेरे, 
प्यासा रखूँगा तुझे अब ठान कर रखता हूँ मैं।
हर कदम तू लड़ाती रही दुनिया भर से मुझे,
हारने पर भी मुस्कुराता रहता हूँ मैं।
खून बहता रहा मेरा , तू मुस्कुराती है
छलनी बदन को भी बार बार सीता रहता हूँ मैं।
देख फिर से खड़ा हूँ जंग - ए - मैदाने तेरे,
हर बार कट कट कर भी जीता रहता हूँ मैं।
ये शख्शियत है मेरी कि तू हराती रही.
जीत की उम्मीद पर लड़ता रहता हूँ मैं।

मैंने सरकारी नौकरी नही की क्यों कि....

मैंने सरकारी नौकरी नही की क्यों कि मुझे सिक्योरिटी नहीं चाहिए. मैं जानता हु कि मेरी लाइफ सिक्योर नही है. मुझे नही पता कब और कहाँ मौत मेरा इंतज़ार कर रही है तो फिर मैं सिक्योर जॉब क्यों खोजू , क्यों न मैं वो करू जिन्हे लोग अंन-सिक्योर और मुस्किल मानते है. मेरा मानना है कि आप ऊंचाई और सिक्योरिटी एक साथ नही चुन सकते. और मुझे ऊंचाई पसंद है.