क्या है ये प्यार की कहानी...?
जब पहली - पहली बार वह मेरी ओर आकर्षित हुई थी . मै जानता था की ये बस उम्र की फितरत है, जो कालेज की प्रार्थना स्थल पर हर रोज या फिर अक्सर अद्यापको द्वारा मेरी काबिलियत की तारीफ पर मेरी शख्सियत की ओर खिचती चली आ रही थी. मेरी ओ ढेर साडी पेंटिंग्स या फिर इर्द गिर्द पड़ी मगज़िनेस पर छोई मेरी छोटी - मोटी कहानिया या फिर लेख पर गदगद हो कर मेरी काल्पनिक तश्बीर को अपने दिल के किसी कोने में सजाने की कोशिश कर रही है. मै जानता था ये प्यार नहीं है.....उम्र १६-१७ की रही होगी, और शायद ये प्यार की उम्र नहीं होती.
उस समय मोबाईल का उतना चलन भी न था, काफी काम लोगो की जेब में हुआ करता, हां मै खुशनशीब था और शायद वह भी. हम दोनों के पास था. नयी - नयी गाड़ी पर खा-म-खा कपडा मरने को दिल कर ही जाता है धुल का होना उनता जरूरी नहीं होता.
अक्सर उसकी मिस कॉल होती जवाब में मेरी २ मिनट की कॉल, पैसे भी काम होते मगर उतनी सी आवाज काफी हुआ करती दिल की उथल पुथल के लिए. बात बढ़ी, नजदीकिय बढ़ी, मगर दिल में अब भी यकीं था की ये प्यार नहीं है. हद तो तब हुई जब करीबियों का सिलसिला तेज हुआ, हसरतें बढ़ी और इजहार हुआ.---- ३ शब्द! आई लव यू..... यकीं तो अब भी था की ये प्यार नहीं है.
वक्त गुजरने के साथ बातो में दिलचस्पी बनी रहे सो बातो में हमने सपनो का जिक्र जरूरी समझा जाता है और हमने भी जरूरी समझा. बातें आगे बढ़ी, बातें आगे बढ़ी दिलों के कोनो से निकल कर पूरे दिलों में फैलना शुरू हो गयी. बातो में सपनो के सिलसिलों ने जिन्दगी के दुसरो पड़ाव में दखलंदाजी शुरू कर दी.
शादी ! जिन्दगी का एक अहम फैसला ! बात थमी नहीं और यहाँ तक आ पहुची. मगर यकीं अब भी वही था कि ये प्यार नहीं है.
हसरतें अपने पांव फैलाती रही, लम्बी रातों में लम्बी बैटन के सिलसिलें बनते चले गए. वह पूछती हम शादी कब करेगे और उत्तर में मै मुस्कुरा पड़ता- अजी कर लेगे वैसे भी अभी उम्र ही क्या है? उसका संदेह तडप उठता... उफ़! अगर शादी नहीं हुए तो ? मै हसने से नहीं चुकता - अजी ऐसे कैसे हो सकता है.... शादी होगी और जरूर होगी! मेरे होठो पे अगला शब्द होता मगर धडकनों को इसकी कोई परवाह न होती इन बातो से. होगी तो हो ही जाएगी न हुई तो न सही. क्यों कि मै जानता था कि ये प्यार नहीं है.
हदें और सरहदें थमी नहीं शादी को अभी लम्बा वक्त था कि अपने ख्वाबो के महल कि बातें शुरू होगई. उन पर भी जी नहीं भरा तो बच्चो कि बातें शुरू हुई. उनके नामों कि परिकल्पनाए हवा में उड़ान भरने लगी. उसका दिल रखने के लिए सब कुछ स्वावीकर करता हाँ ऐसे भी होगा.... वैसे भी होगा.... हम ये भी करेंगे ....हम ओ भी करेंगे.
फिर सपनो का खिचाव इतना बढ़ा कि उनके टूटने का डर सताने लगा. अब जब भी दूर होने या फिर जुदा होने कि बातें होती तो दिल उतना बेपरवाह न था. मगर यकीं तब भी था कि उसे उतना दर्द न होगा अगर उसके साथी कि शादी कही और होती है
जिन्दगी के ये हसीं लम्हे थे जो साथ- साथ गुजर गए-कुछ हसरतों के साथ...... कुछ ख्वाबो के साथ... न कभी मै समझ सका और नहीं शायद वह. बस बहते गए फिर दरिया कब आ गया पाता ही नहीं चला. मेरा वेपर्वाह्पन अब उतना मजबूत नहीं था, अब बातो से भी जी न भरता करीब आने को जी करता. मौका न मिलने पर शादी कि गुन्जाईस शुरू हुई. मेरा यकीं टूटने लगा. ऐसा कुछ था जो मुझे डराना शुरू कर दिया - क्या होगा अगर ओ किसी और कि हो गयी? मै अपना पक्ष मजबूत करना शुरू कर दिया क्यों कि मुझे अंदाजा था कि इस जंग में मेरी मुश्किलें कहाँ तक बढ़ सकती हैं. मतलब मै शादी के लिए तैयार था और वह?
उफ़! मै उसे वेवफा कैसे कहू? पूरे चार साल के रिश्ते पर पर्दें ड़ाल कर उसने सगाई कर ली .... अकेले बगैर मेरे. तब एक और मेरी ही तरह मासूम उसकी जिन्दगी का हिस्सा बन कर मेरे और उसके बीच कि दीवाल में तब्दील हो गया. मैंने सवाल किया तो उसने भी टपक से जवाब दे दिया - मेरी किस्मत में शायद आप नहीं थे.....और ओ सपने जो हमने साथ देखे थे वो? वो कसमे जो साथ खायी थी वो? वो वडा जो तुमने मुझसे किया था वो? वो अरमा जो मैंने तुम्हारे लिए किये थे वो? उसने फिर आगे कुछ नहीं किया शिवाय एक शब्द के -" हम मजबूर थे."
मेरी सांसे अटक गयी... दिल टूट गया... भरोसा उठ गया....
उस दी पहली बार गहराई से सोचा प्यार के बारे में..... जवाब में मिला......
किसी से दुश्मनी निकलने का सबसे अच्छा हथियार है प्यार
किसी बेगैरत के लिए टाइम पास का बेहतर जरिया है प्यार
किसी को बर्बाद करने का सबसे असं रास्ता है प्यार
कुछ इंसानों के लिए ek fashion है प्यार
so dont waist टाइम in love.... just focus in your carier
प्यार to paglo ki tarah apke peechhe aayega.
जब पहली - पहली बार वह मेरी ओर आकर्षित हुई थी . मै जानता था की ये बस उम्र की फितरत है, जो कालेज की प्रार्थना स्थल पर हर रोज या फिर अक्सर अद्यापको द्वारा मेरी काबिलियत की तारीफ पर मेरी शख्सियत की ओर खिचती चली आ रही थी. मेरी ओ ढेर साडी पेंटिंग्स या फिर इर्द गिर्द पड़ी मगज़िनेस पर छोई मेरी छोटी - मोटी कहानिया या फिर लेख पर गदगद हो कर मेरी काल्पनिक तश्बीर को अपने दिल के किसी कोने में सजाने की कोशिश कर रही है. मै जानता था ये प्यार नहीं है.....उम्र १६-१७ की रही होगी, और शायद ये प्यार की उम्र नहीं होती.
उस समय मोबाईल का उतना चलन भी न था, काफी काम लोगो की जेब में हुआ करता, हां मै खुशनशीब था और शायद वह भी. हम दोनों के पास था. नयी - नयी गाड़ी पर खा-म-खा कपडा मरने को दिल कर ही जाता है धुल का होना उनता जरूरी नहीं होता.
अक्सर उसकी मिस कॉल होती जवाब में मेरी २ मिनट की कॉल, पैसे भी काम होते मगर उतनी सी आवाज काफी हुआ करती दिल की उथल पुथल के लिए. बात बढ़ी, नजदीकिय बढ़ी, मगर दिल में अब भी यकीं था की ये प्यार नहीं है. हद तो तब हुई जब करीबियों का सिलसिला तेज हुआ, हसरतें बढ़ी और इजहार हुआ.---- ३ शब्द! आई लव यू..... यकीं तो अब भी था की ये प्यार नहीं है.
वक्त गुजरने के साथ बातो में दिलचस्पी बनी रहे सो बातो में हमने सपनो का जिक्र जरूरी समझा जाता है और हमने भी जरूरी समझा. बातें आगे बढ़ी, बातें आगे बढ़ी दिलों के कोनो से निकल कर पूरे दिलों में फैलना शुरू हो गयी. बातो में सपनो के सिलसिलों ने जिन्दगी के दुसरो पड़ाव में दखलंदाजी शुरू कर दी.
शादी ! जिन्दगी का एक अहम फैसला ! बात थमी नहीं और यहाँ तक आ पहुची. मगर यकीं अब भी वही था कि ये प्यार नहीं है.
हसरतें अपने पांव फैलाती रही, लम्बी रातों में लम्बी बैटन के सिलसिलें बनते चले गए. वह पूछती हम शादी कब करेगे और उत्तर में मै मुस्कुरा पड़ता- अजी कर लेगे वैसे भी अभी उम्र ही क्या है? उसका संदेह तडप उठता... उफ़! अगर शादी नहीं हुए तो ? मै हसने से नहीं चुकता - अजी ऐसे कैसे हो सकता है.... शादी होगी और जरूर होगी! मेरे होठो पे अगला शब्द होता मगर धडकनों को इसकी कोई परवाह न होती इन बातो से. होगी तो हो ही जाएगी न हुई तो न सही. क्यों कि मै जानता था कि ये प्यार नहीं है.
हदें और सरहदें थमी नहीं शादी को अभी लम्बा वक्त था कि अपने ख्वाबो के महल कि बातें शुरू होगई. उन पर भी जी नहीं भरा तो बच्चो कि बातें शुरू हुई. उनके नामों कि परिकल्पनाए हवा में उड़ान भरने लगी. उसका दिल रखने के लिए सब कुछ स्वावीकर करता हाँ ऐसे भी होगा.... वैसे भी होगा.... हम ये भी करेंगे ....हम ओ भी करेंगे.
फिर सपनो का खिचाव इतना बढ़ा कि उनके टूटने का डर सताने लगा. अब जब भी दूर होने या फिर जुदा होने कि बातें होती तो दिल उतना बेपरवाह न था. मगर यकीं तब भी था कि उसे उतना दर्द न होगा अगर उसके साथी कि शादी कही और होती है
जिन्दगी के ये हसीं लम्हे थे जो साथ- साथ गुजर गए-कुछ हसरतों के साथ...... कुछ ख्वाबो के साथ... न कभी मै समझ सका और नहीं शायद वह. बस बहते गए फिर दरिया कब आ गया पाता ही नहीं चला. मेरा वेपर्वाह्पन अब उतना मजबूत नहीं था, अब बातो से भी जी न भरता करीब आने को जी करता. मौका न मिलने पर शादी कि गुन्जाईस शुरू हुई. मेरा यकीं टूटने लगा. ऐसा कुछ था जो मुझे डराना शुरू कर दिया - क्या होगा अगर ओ किसी और कि हो गयी? मै अपना पक्ष मजबूत करना शुरू कर दिया क्यों कि मुझे अंदाजा था कि इस जंग में मेरी मुश्किलें कहाँ तक बढ़ सकती हैं. मतलब मै शादी के लिए तैयार था और वह?
उफ़! मै उसे वेवफा कैसे कहू? पूरे चार साल के रिश्ते पर पर्दें ड़ाल कर उसने सगाई कर ली .... अकेले बगैर मेरे. तब एक और मेरी ही तरह मासूम उसकी जिन्दगी का हिस्सा बन कर मेरे और उसके बीच कि दीवाल में तब्दील हो गया. मैंने सवाल किया तो उसने भी टपक से जवाब दे दिया - मेरी किस्मत में शायद आप नहीं थे.....और ओ सपने जो हमने साथ देखे थे वो? वो कसमे जो साथ खायी थी वो? वो वडा जो तुमने मुझसे किया था वो? वो अरमा जो मैंने तुम्हारे लिए किये थे वो? उसने फिर आगे कुछ नहीं किया शिवाय एक शब्द के -" हम मजबूर थे."
मेरी सांसे अटक गयी... दिल टूट गया... भरोसा उठ गया....
उस दी पहली बार गहराई से सोचा प्यार के बारे में..... जवाब में मिला......
किसी से दुश्मनी निकलने का सबसे अच्छा हथियार है प्यार
किसी बेगैरत के लिए टाइम पास का बेहतर जरिया है प्यार
किसी को बर्बाद करने का सबसे असं रास्ता है प्यार
कुछ इंसानों के लिए ek fashion है प्यार
so dont waist टाइम in love.... just focus in your carier
प्यार to paglo ki tarah apke peechhe aayega.
