मना रहा था मातम जमाना, साथ मिल जब हार का, तलास में नई राह की , मै उम्मीद लिए चलता रहा। सर्द थी वो रात मगर मै आग सा जलता रहा।
मै छोटापन तब महसूस करता हू जब अपने स्वार्थ के लिए किसी के सामने अपने हाथ जोड़ता हू।
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